उपच्छाया ग्रहण वास्तव में चंद्र ग्रहण नहीं होता प्रत्येक चंद्रग्रहण के घटित होने से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया में  प्रवेश करता है जिसे चन्द्र मालिन्य कहा जाता है उसके बाद ही वह पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है तभी उसे वास्तविक ग्रहण कहा जाता है भूभाग में चंद्रमा के संक्रमण काल को चंद्रग्रहण कहा जाता है|
ध्यान रहे कई बार पूर्णिमा को चंद्रमा उपच्छाया में प्रवेश कर उपच्छया शंकु से ही बाहर निकल जाता हैइस उपच्छाया के समय चंद्रमा का बिम्ब केवल धुंधला पड़ता है काला नहीं होता तथा इस धुंधलेपन को साधारण नंगी आंख से देख पाना संभव नहीं होता|  धर्मशास्त्रकारों ने इस प्रकार के उप ग्रहणों (उपच्छाया) में चन्द्र बिंब पर मालिन्य मात्र छाया आने के कारण उन्हें ग्रहण की कोटी में नहीं रखाप्रत्येक चंद्रग्रहण घटित होने से पहले तथा बाद में भी चंद्रमा को पृथ्वी की इस उपच्छाया में से गुजरना पड़ता है जिसे ग्रहण की संज्ञा नहीं दी जा सकती|
वास्तव में उपच्छाया ग्राहणों में ना तो अन्य वास्तविक ग्रहणों की भांति पृथ्वी पर उनकी काली छाया पड़ती है ना ही सौरपिण्डों (सूर्य चन्द्र) की भांति उनका वर्ण काला होता है केवल चंद्रमा की आवृत्ति थोड़ी धुंधली सी हो जाती हैंअतः धर्मनिष्ठ एवं श्रद्धालु जनों को इन्हें ग्रहण कोठी में न मानते हुए एवं ग्रहण सम्बन्धी पथ्य अपथ्य का विचार ना करते हुए पूर्णिमा सम्बन्धित साधारण व्रतउपवासदान आदि का अनुष्ठान करना चाहिए|
इस बात का ध्यान रहे कि यह उपच्छाया ग्रहण वास्तव में चंद्रग्रहण नहीं होता इस उपच्छाया ग्रहण की समय अवधि में चंद्रमा की चाँदनी में केवल कुछ धुंधलापन आ जाता है इस उपच्छाया ग्रहण के सूतक स्नान दान आदि महात्म्य का विचार भी नहीं होगा|
30 नवंबर 2020 में भारत के उत्तर पश्चिमी, मध्य, दक्षिणी प्रांतों में यह उपच्छाया दिखाई नहीं देगा| शेष उत्तर पूर्वी, मध्य पूर्वी, भारत में जहां चंद्रोदय सायं 17 घं 23 मिनट से पहले होगा, वहां यह उपच्छाया ग्रस्तोदय रूप में दृश्य होगा| अर्थात जब चंद्रोदय होगा, तब छाया चल रही होगी| भारत के अतिरिक्त यह उपच्छाया अधिकतर एशिया (पाकिस्तान, पश्चिमी दक्षिणी भारत, ईरान, ईराक, अफगानिस्तान को छोड़कर), इंग्लैंड, आयरलैंड, नार्वे, उत्तर स्वीडन, उत्तरी फिनलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा प्रशान्त महासागर में दिखाई देगा
भारतीय स्टैंडर्ड टाइम स्पर्शादिकाल इस प्रकार हैं-
उपच्छाया चंद्रग्रहण स्पर्श- 13:02 AM
उपच्छाया चंद्रग्रहण मध्य- 15:13 AM
उपच्छाया चंद्रग्रहण मोक्ष- 17:23 AM
इस उपच्छाया चन्द्र ग्रहण के सूतकादिग्रहण सम्बन्धी धार्मिक कृत्यों का विचार नहीं होगा|
इस उपच्छाया ग्रहण के स्नानसूतक आदि का विचार नहीं होगापूर्णिमा संबंधी सभी धार्मिक कृत्य जैसे- व्रतउपवासदानसत्यनारायण व्रत पूजन आदि तो निसंकोच होकर करने ही चाहिए|
ध्यान रहे भारतीय ज्योतिष के प्राचीन प्रमाणिक ग्रंथों में भी इस उपच्छाया या धुंधलेपन का धार्मिक महत्व नहीं बतलाया गया हैउपच्छाया ग्रहण में ना तो अन्य पूर्ण अथवा खंडग्रास ग्रहणों की भान्ति पृथ्वी पर उनकी काली छाया पड़ती है और ना ही सौरपिण्डों (सूर्य- चन्द्र) की भान्ति उनका वर्णन काला होता है केवल चंद्रमा की आकृति में उसका प्रकाश कुछ धुंधला सा हो जाता है|